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थार की संस्कृति इतिहास परंपरा और समाचारों का साझा मंच (बाड़मेंर) ----- बाड़मेंर की ताजा खबर Mʌgʀʌj Cʜoudʜʌʀy


इस विरोध प्रदर्शन में सोशल मीडिया में नरेंद्र मोदी के नाम 'साहेब' का जबरदस्त इस्तेमाल देखने को मिला. बारात के रथ तीन लोग बैठे थे, एक के चेहरे पर अमित शाह का मुखौटा था वहीं दूसरे के चेहरे पर नरेंद्र मोदी का. इन तीन लोगों में एक महिला भी बैठी थी. उसने किसी अभिनेत्री का मुखौटा डाला हुआ था. इसके अलावा बारातियों के हाथ में कार्डबोर्ड थे. जिस पर लिखा था...'आज मेरे साहेब की शादी है.'
कांग्रेस की मांग है कि नरेंद्र मोदी अपने करीबी अमित शाह पर एक महिला की जासूसी कराने के आरोपों पर सफाई दें.
यह है जासूसी कांड
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के घनिष्ठ सहयोगी और राज्य के पूर्व गृहमंत्री अमित शाह पर 2009 में एक युवती की अवैध तरीके से निगरानी के लिए सत्ता और पुलिस मशीनरी का दुरुपयोग करने का आरोप लगा है. कोबरापोस्ट और गुलेल डॉट कॉम द्वारा आधे घंटे से अधिक समय की टेलीफोन बातचीत की रिकार्डिंग भी जारी की गयी, जो कथित तौर पर शाह और गुजरात के आईपीएस अधिकारी जीएल सिंघल के बीच हुई बताई जाती है. अगस्त और सितंबर, 2009 के बीच टैप की गयी बातचीत में प्रधानमंत्री पद के बीजेपी के उम्मीदवार मोदी के नाम का उल्लेख नहीं है, लेकिन वेबसाइट कहती है कि 'बातचीत सुनने के बाद इसमें कोई संदेह नहीं रह जाता कि इस ऑपरेशन में शामिल लोग किसी 'साहेब' को जानते थे' जिनके कहने पर कथित जासूसी की जा रही थी.

बच्ची का परिवार सोमवार की रात एक शादी समारोह में हिस्सा लेने के लिए रघुपुरा कस्बे में गया था. इस दौरान वो अपने परिवार वालों से बिछड़ गई. मंगलवार की सुबह लावारिस हालत में उसकी लाश मिली तो पता लगा कि उसे दरिंदगी का शिकार बनाया गया है.
आशंका जताई जा रही है कि अपहरण करके पहले तो गैंगरेप किया गया फिर उसकी हत्या कर दी गई. पुलिस ने नाबालिग बच्ची के साथ दरिंदगी के मामले में धारा 302 के तहत केस दर्ज करके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. अगर पोस्टमॉर्टम में रेप की पुष्टि होती है तो धारा 376 के तहत भी धाराएं लगाई जाएंगी.
पिछले कुछ दिनों में ग्रेटर नोएडा में आपराधिक घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं. लूट, हत्या और किडनैपिंग के साथ रेप की इन घटनाओं ने यूपी में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

अदालत ने राजेश तलवार पर 17 हजार और नूपुर तलवार पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया. अदालत से सजा के बारे में जानकारी मिलने पर तलवार दंपति के चेहरे पर पछतावे का भाव देखा गया.राजेश तलवार को डासना जेल के वार्ड नंबर 11 और नूपुर तलवार को वार्ड नंबर 13 में रखा गया है. जेल के भीतर राजेश तलवार की पहचान अब कैदी नंबर 9342 के रूप में होगी. नूपुर तलवार होंगी कैदी नंबर 9343.
इससे पहले अदालत ने सोमवार को नूपुर और राजेश तलवार को बेटी आरुषि और हेमराज के कत्ल के लिए दोषी ठहराया था. पढ़ें: इस मर्डर मिस्ट्री में कब क्या हुआ...
सजा के ऐलान से पहले दोपहर 2:10 पर सजा पर बहस की गई. इस दौरान सीबीआई के वकील आरके सैनी ने कहा कि यह मामला रेयरस्ट ऑफ द रेयर की श्रेणी में आता है, क्योंकि मई 2008 में आरुषि और नौकर हेमराज तलवार दंपति के नोएडा स्थित घर में मृत पाए गए थे और उनके गले रेते हुए थे, इसलिए राजेश और नूपुर तलवार को सजा-ए-मौत मिलनी चाहिए.
वहीं, बचाव पक्ष के वकील ने यह कहते हुए तलवार दंपति के लिए रहम की अपील की कि उनके मुवक्किलों का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है. उन्होंने कहा कि केस की सुनवाई के दौरान जो भी बातें कहीं गईं हैं वो सिर्फ कहानी भी हो सकती है क्योंकि इस केस में कोई गवाह नहीं है. वारदात की रात जो कुछ भी वह क्षणिक आवेश का नतीजा था इसलिए इस केस को रेयरस्ट ऑफ द रेयर नहीं माना जा सकता.
नूपुर की तबीयत बिगड़ी
वहीं, डासना जेल में नूपुर तलवार की मंगलवार सुबह तबीयत खराब हो गई. उनका ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ गया और उन्हें एसीडिटी हो गई. डॉक्टरों ने कोर्ट भेजने से पहले उनकी जांच की और उन्हें दवा दी.
दरअसल, सोमवार रात नूपुर ने जेल में खाना नहीं खाया था, जिसके बाद जेल सुप्रीटेंडेंट ने उन्हें खाना खाने के लिए कहा और कहा कि अगर उन्होंने बात नहीं मानी तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इसके बाद नूपुर ने खाना तो खाया, लेकिन वह रातभर सोई नहीं और बीच-बीच में उठती रहीं. डॉक्टर का कहना है कि यही वजह है कि उनका बीपी बढ़ने के साथ ही उन्हें एसीडिटी की परेशानी भी हो गई.
अदालत ने लगाई ये धाराएं
अदालत ने दोनों को आईपीसी की धारा 302 (हत्या ) के तहत दोषी ठहराया है. इसके अलावा राजेश तलवार को आईपीसी की धारा 203 (गलत एफआईआर दर्ज कराने के दोषी), 201 (सबूत मिटाना)और 34 (कॉमन इंटेंशन) के तहत दोषी माना है. वहीं, नूपुर को 302 के अलावा धारा 201 और 34 के तहत दोषी ठहराया है.
हमने आरुषि को नहीं मारा: तलवार दंपति
फैसले के बाद राजेश और नूपुर तलवार की ओर से मीडिया में एक बयान जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि वे फैसले से नाखुश हैं. बयान के मुताबिक, 'हम फैसले से बहुत दुखी हैं. हमें एक ऐसे जुर्म के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, जो हमने किया ही नहीं. लेकिन हम हार नहीं मानेंगे और न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेंगे.'
'सीबीआई की गरिमा बचाने की कोशिश'
तलवार दंपति की एक रिश्तेदार ने फैसले के बाद कहा, 'ट्रायल की जरूरत ही क्या थी. लोगों को पहले से पता था क्या होने वाला है. सीबीआई की गरिमा को बचाने के लिए सच को झूठ की परतों में दबा दिया गया.' उधर, बचाव पक्ष के वकील ने इस फैसले को गलत माना है. उन्होंने कहा कि ये गैरकानूनी है. तलवार दंपति की वकील रेबेका जॉन ने कहा है कि वे फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे.
आरुषि हत्याकांड अब तक
16 मई 2008 को आरुषि की हत्या के बाद उसके पिता राजेश तलवार 23 मई 2008 को गिरफ्तार कर लिया गया था. इस हाईप्रोफाइल केस ने पुलिस को छका कर रख दिया. पुलिस बार-बार बयान बदलती रही और केस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहा था, जिसके बाद 31 मई 2008 को केस सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया. जून में राजेश तलवार के कंपाउंडर कृष्णा को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया गया. 10 दिन बाद तलवार के दोस्त के नौकर राजकुमार और विजय मंडल को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया गया था.
सीबीआई जांच कर रही थी, लेकिन दिसबंर 2010 में आखिरकार सीबीआई थक गई और क्लोजर रिपोर्ट यह कहते हुए दाखिल की गई कि उसे राजेश तलवार पर ही शक है, लेकिन उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है. उसके बाद तलवार दंपति इस क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ कोर्ट चले गए. कोर्ट ने भी रिपोर्ट को रिजेक्ट कर दिया और एक नाटकीय घटनाक्रम में तलवार दंपति को फिर से समन जारी कर दिया और सीबीआई को दोबारा मामला चलाने का आदेश दिया गया.
फरवरी 2011 में गाजियाबाद की स्पेशल कोर्ट ने राजेश तलवार और नूपुर तलवार पर ट्रायल शुरू करने के आदेश दिए सीबीआई कोर्ट ने अदालत में मौजूद ना रहने पर तलवार दंपति के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया. अप्रैल 2011 में नुपुर तलवार को गिरफ्तार कर लिया गया.
आखिरकार मई 2011 में कोर्ट ने राजेश तलवार और नूपुर तलवार पर हत्याकांड को अंजाम देने और सबूत मिटाने का आरोप तय कर दिया. सितबंर 2011 में नूपुर तलवार को जमानत मिल गई. अप्रैल 2013 में सीबीआई के अधिकारी ने कोर्ट में कहा कि आरुषि और हेमराज की हत्या तलवार दंपति ने ही की है. सीबीआई ने कोर्ट को ये भी बताया कि आरुषि और हेमराज आपत्तिजनक अवस्था में मिले थे.
बचाव पक्ष के वकील ने 3 मई को स्पेशल कोर्ट के सामने अपील की कि वह 14 हवाहों को कोर्ट में बुलाए. सीबीआई ने इस अपील का विरोध किया. 6 मई 2013 को तलवार की इस अर्जी को ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया. साथ में राजेश और नूपुर के बयानों को रिकॉर्ड करने के भी आदेश दिए. 13 मई को सुप्रीम कोर्ट ने तलवार दंपत्ति को कड़ी फटकार लगाते हुए उनकी अर्जी को खारिज कर दिया. कुल मिलाकर तारीख बढ़ती गई और आखिरकार लंबे इंतजार के बाद आरुषि और हेमराज को न्याया मिल ही गया.
एक नजर इस मर्डर मिस्ट्री पर कि कब क्या हुआ-
16 मई, 2008: आरुषि तलवार को नोएडा स्थित अपने घर में मृत पाया गया, उसके गले की नस कटी हुई थी. नेपाली घरेलू नौकर हेमराज पर हत्या का शक.
17 मई 2008: हत्या के अगले ही दिन नौकर हेमराज का शव तलवार के घर की छत पर मिला.
18 मई 2008: पुलिस ने कहा कि हत्या का तरीका किसी दक्ष सर्जरी करने वाले द्वारा किया गया जान पड़ता है.
23 मई 2008: आरुषि के पिता दंत चिकित्सक राजेश तलवार दोहरी हत्या के लिए गिरफ्तार किए गए.
31 मई 2008: तत्कालीन मायावती सरकार ने मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा.
13 जून 2008: पुलिस ने राजेश तलवार के कंपाउंडर कृष्णा को गिरफ्तार किया. 10 दिनों बाद तलवार दंपत्ति के चिकित्सक मित्र का नौकर और तलवार के पड़ोसी का नौकर विजय मंडल भी गिरफ्तार किया गया.
12 जुलाई 2008: सीबीआई द्वारा सबूत जुटा पाने में असफल रहने पर डॉ. राजेश को जमानत दी गई.
5 जून 2010: सीबीआई ने तलवार दंपत्ति पर नार्को जांच के लिए अदालत में याचिका दाखिल की.
29 दिसंबर 2010: सीबीआई ने मामला बंद करने की रिपोर्ट दाखिल की और कहा कि मुख्य संदिग्ध आरुषि के पिता राजेश तलवार हैं, लेकिन उनके खिलाफ सबूत नहीं हैं.
25 जनवरी 2011: राजेश तलवार पर गाजियाबाद अदालत परिसर में एक युवक द्वारा हमला किया गया.
9 फरवरी 2011: गाजियाबाद की विशेष अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी और कहा कि आरुषि-हेमराज हत्या मामले में राजेश और नुपुर तलवार पर मामला चलाया जाए. दंपत्ति पर हत्या के बाद सबूत मिटाने का भी आरोप है. गाजियाबाद की एक सीबीआई अदालत ने दंपत्ति के खिलाफ अदालत में उपस्थित नहीं होने के लिए जमानती वारंट जारी किया.
14 मार्च 2012: सीबीआई ने अदालत में राजेश तलवार की जमानत याचिका खारिज करने की अपील की.
30 अप्रैल 2012: आरुषि की मां नूपुर तलवार को गिरफ्तार किया गया.
3 मई 2012: सत्र अदालत ने नूपुर तलवार की जमानत याचिका खारिज की.
25 मई 2012: तलवार दंपत्ति पर गाजियाबाद अदालत ने हत्या, सबूत मिटाने और षडयंत्र रचने का आरोप लगाया.
25 सितंबर 2012: नूपुर तलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जमानत दी गई.
अप्रैल 2013: सीबीआई अधिकारी ने अदालत से कहा कि आरुषि और हेमराज की हत्या राजेश तलवार ने की. सीबीआई ने कहा कि हत्या के वक्त आरुषि और हेमराज को आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया था.
3 मई 2013: बचाव पक्ष के वकील ने एक विशेष अदालत में पूर्व सीबीआई संयुक्त निदेशक अरुण कुमार (गवाह के रूप में) सहित 14 लोगों को समन भेजने के लिए याचिका दाखिल की. सीबीआई ने याचिका का विरोध किया.
6 मई 2013: निचली अदालत ने 14 लोगों को समन भेजने की तलवार की याचिका खारिज की. उसने राजेश और नूपुर तलवार के रिकॉर्डेड बयान लेने के आदेश दिए.
18 अक्टूबर 2013: सीबीआई ने जिरह बंद की और कहा कि तलवार दंपत्ति ने जांच को गुमराह किया है.
12 नवंबर 2013: अदालत ने अपना फैसला 25 नवंबर तक के लिए सुरक्षित रख लिया.
25 नवंबर 2013: सीबीआई की अदालत ने राजेश और नूपुर तलवार को हत्या का दोषी करार दिया.
रिश्तों के कत्ल की कहानी
संभव नहीं है कि आरुषि का दिल मां की धड़कन के साथ ना धड़कता हो. अंसभव है कि नूपुर तलवार की धड़कन बेटी के साथ ना जुड़ी हो. 14 बरस जिन हाथों ने गीली मिट्टी की तरह अपनी बच्ची को गूथा हो, उसे जिंदगी जीने की एक शक्ल दी, उसी की हत्या. अदालत का फैसला तो ऐलान होने के साथ ही संबंधों के दायरे में रुक सा गया.
मम्मी-पापा ने हत्या की. आरुषि की हत्या के बाद मम्मी-पापा को लेकर साढे पांच बरस लगातार जिस जख्म को समूचा समाज कुरेदता रहा साढे पांच बरस बाद अदालत ने उसी जख्म को बीमारी करार दिया. तो मम्मी-पापा के लिए सजा शुरू हुई या फिर सजा खत्म हुई. सजा का ऐलान मंगलवार को होगा, लेकिन इससे बड़ी सजा हो क्या सकती है, जो फैसला अदालत ने दिया. इसलिए अब बदलते समाज के आईने में रिश्तों को नए सिरे से खोजना जरूरी है.
जिस समाज, जिस परिवेश और जिस जीवन को आरुषि के मम्मी-पापा जी रही थे वह मध्यम वर्ग की चकाचौंध की चाहत और खुले जीवन की आकांक्षा समेटे हुए है. महानगरों के लिए खुलापन जिंदगी जीने का आक्सीजन बन चुका है और यहीं से शुरू होता है कच्ची-मीठी सरीखा आरुषि का जीवन और उसे उसी समाज, उसी परिवेश के अनुकुल बनाने में लगे मम्मी-पापा.
तो क्या मम्मी-पापा परंपरा और आधुनिकता के बीच जा फंसे जहां खुलापन और चकाचौंध अपनी हद में सुकून देता है, लेकिन बेटी को कटघरे में खड़ा जानता है और खुद किसी भी हद तक जाने को तैयार. असल मुश्किल यही है और शायद बीते साढे पांच बरस तक पुलिस, सीबीआई से लेकर समाज के सामने जिरह करते मम्मी-पापा का दर्द भी यही है और सुकुन भी यही कि बेटी के हत्यारे मम्मी-पापा हैं.
यह ऐसा फैसला है, जिसने देश की सबसे बडी मर्डर मिस्ट्री को बदलते भारत की उस नई शक्ल जो जोड़ दिया है, जो अभी तक रिश्तों की डोर थाम कर जिंदगी जीने का मुखौटा पहने रहता था. कभी ऑनर किलिंग कहकर सीना तानने से नहीं कतराता तो कभी आवारा पूंजी को ही जिंदगी का सच मान चकाचौंध की उड़ान भरने से नही घबराता. तो इस नए भारत में आपका स्वागत है.


विशेष जांच दल ने कहा कि डॉ. राजेश तलवार ने आरुषि के कमरे में उसे और नौकर हेमराज को आपत्तिजनक स्थिति में पाने के बाद गोल्फ स्टिक से दोनों पर क्रूरतापूर्वक प्रहार किया. उन्होंने आरुषि के माथे पर और हेमराज के सिर पर प्रहार किया.
डॉ. राजेश और डॉ. नूपुर को 15-16 मई 2008 की रात को नोएडा स्थित अपने आवास में 14 वर्षीय बेटी आरुषि तथा नौकर हेमराज की हत्या का दोषी ठहराया गया है.
सीबीआई ने कहा कि आरुषि के माथे पर अंग्रेजी के वी अक्षर (V) जैसा चोट का निशान गोल्फ क्लब की चोट से ही हो सकता था, क्योंकि यह निशान गोल्फ स्टिक की सतह से प्रहार करने पर हुई चोट से मिलता था.
आरुषि और हेमराज के शवों का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर सुनी दोहरे और डॉ. नरेश राज ने निष्कर्ष निकाला कि मृतकों की चोट संभवत: गोल्फ स्टिक की वजह से थी.
इस थ्योरी को साबित करने के लिए विशेष जांच दल ने 25 सितंबर 2009 को डॉ. मोहिंदर सिंह दाहिया से संपर्क किया. दल ने गुजरात फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के डॉ. दाहिया से अपराध स्थल के विश्लेषण पर एक रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा.
दाहिया सीबीआई अधिकारियों के साथ नौ अक्तूबर 2009 को तलवार के आवास पर गए. बहरहाल बचाव पक्ष का दावा था कि दाहिया कभी तलवार के आवास पर गए ही नहीं और अपराध स्थल, मृतकों की 14 तस्वीरों, अभियोजन पक्ष के कुछ गवाहों, डॉ. दोहरे तथा मामले के जांच अधिकारी के करीब 161 बयानों के आधार पर उन्होंने अपनी रिपोर्ट बना दी.
दाहिया ने 26 अक्तूबर 2009 को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें उन्होंने साफ कहा कि हत्या संभवत: गोल्फ क्लब तथा सर्जिकल ब्लेड से की गई है और हत्या में तलवार दंपती को छोड़कर कोई बाहरी आदमी शामिल नहीं था. दाहिया ने यह भी कहा था कि आरुषि और हेमराज की हत्या आरुषि के बिस्तर पर ही की गई.
इस रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई के जांच दल ने 29 अक्तूबर 2009 को तलवार दंपती को नोटिस भेजकर गोल्फ स्टिक पेश करने को कहा. अगले दिन तलवार दंपती ने करीब दर्जन भर गोल्फ स्टिक पेश कर दिये. सीबीआई ने सभी को सील कर दिया.
सीबीआई ने सीएफएसएल के वैज्ञानिक डीके तंवर की जांच का भी हवाला दिया. तंवर ने पाया कि जांच के दौरान दो गोल्फ स्टिक (लोहे की गोल्फ क्लब संख्या 4 और लकड़ी की गोल्फ क्लब संख्या 5) अन्य की तुलना में साफ थीं. सीबीआई की थ्योरी के अनुसार, आरोपियों ने सबूत नष्ट करने के लिए हत्या के कथित हथियार को साफ किया था.
2 अगस्त 2012 को जांच एजेंसी ने डॉ. तलवार के ड्राइवर को दोनों गोल्फ क्लब की शिनाख्त करने के लिए सीबीआई ऑफिस बुलाया, जिन्हें उसने जनवरी 2008 में हेमराज के कमरे में रखा था.
सीबीआई की थ्योरी के अनुसार, राजेश ने आरुषि और हेमराज को मारने के लिए हेमराज के कमरे से एक गोल्फ स्टिक उठाया था.

इन आरोपों को खारिज करते हुए चौधरी ने कहा, 'बिना शर्त माफी मांगकर आप किस तरह से मामले को रफा-दफा करेंगे. उनकी बिना शर्त माफी को उन्हें खुद को बलात्कारी मान लेने के रूप में पेश किया जा रहा है. अगर लोग समझने का प्रयास करेंगे तब वे इस बात को समझ सकेंगे.' बहरहाल, महिला पत्रकार ने कहा कि पत्रिका की कर्मचारी के रूप में 'किसी प्रकार के दबाव से मुक्त होने के लिए' उन्होंने इस्तीफा दिया है.
शोमा चौधरी को लिखे पत्र में पीड़िता ने कहा, 'ऐसे समय में जब मैं अपने आप को ऐसे अपराध की पीड़ित के रूप में पाती हूं तब मैं यह देख कर हैरान हूं कि तहलका की मैनेजिंग एडिटर के तौर पर आप डराने-धमकाने और चरित्र हनन का हथकंडा अपना रही हैं.'
उन्होंने लिखा, '7 नवंबर के बाद घटना की सीरीज के मद्देनजर यह केवल इतनी बात नहीं है कि तेजपाल ने कर्मचारी के तौर पर मुझे विफल किया, बल्कि तहलका ने महिला कर्मचारियों, पत्रकारों को समग्र रूप से विफल किया है. कृपया मेरा इस्तीफा तत्काल स्वीकार करें.' गौरतलब है कि गोवा पुलिस ने तेजपाल के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया है.
सूत्रों ने कहा कि महिला पत्रकार ने दो दिन पहले ही तहलका प्रबंधन को अपना इस्तीफा भेज दिया था, क्योंकि वह संस्थान की कर्मचारी के रूप में किसी प्रकार के दबाव से मुक्त होना चाहती थी. महिला पत्रकार ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा था कि तेजपाल को बचाने के लिए उन पर तथा उनके परिवार पर दबाव डाला जा रहा है और धमकाया जा रहा है.
इस मामले में तहलका प्रबंधन से नाखुश सलाहकार संपादक जय मजूमदार और सहायक संपादक रेवती लाउल ने भी इस्तीफे दे दिए हैं.
ऐसी खबरें हैं कि तहलका के साहित्य संपादक सौगत दासगुप्ता ने भी इस्तीफा दे दिया है और कई अन्य लोगों के भी आने वाले दिनों में पद छोड़ने की आशंका है.
गोवा पुलिस की तीन सदस्यीय टीम ने पिछले दो दिनों में तहलका की मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी और तीन अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की. महिला पत्रकार ने तीन सहकर्मियों का जिक्र किया था जिनके साथ उन्होंने गोवा के एक होटल की लिफ्ट में हुई कथित घटना के बाद बातचीत की थी.
उधर, तेजपाल ने अग्रिम जमानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिस पर आज सुनवाई है. गोवा पुलिस ने इस घटना के संबंध में 22 नवंबर को तेजपाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी.

वारदात शुक्रवार की है. महिला अपनी 6 साल की बच्ची को स्कूल से वापस लाने के लिए ऑटो पर बैठी, जिसमें कुछ अन्य लोग भी सवार थे. आरोप है कि इसी दौरान 4 लोगों से महिला से बलात्कार किया और फिर उसे घायल कर दिया.
स्थानीय लोगों ने देखा कि कुछ लोग गंभीर रूप से जख्मी महिला को ऑटो से नीचे फेंक रहे हैं. इसके बाद जब पुलिस को घटना की जानकारी दी गई, तब उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. रविवार को महिला ने दम तोड़ दिया.
इस घटना के विरोध में सोमवार को महिला संगठनों और स्थानीय लोगों नेशनल हाइवे 52 को जाम कर दिया. अपराधियों की धर-पकड़ की कोशिश की जा रही है.

अदालत ने दोनों को आईपीसी की धारा 302 (हत्या ) के तहत दोषी ठहराया है. इसके अलावा राजेश तलवार को आईपीसी की धारा 203 (गलत एफआईआर दर्ज कराने के दोषी), 201 (सबूत मिटाना)और 34 (कॉमन इंटेंशन) के तहत दोषी माना है. वहीं, नूपुर को 302 के अलावा धारा 201 और 34 के तहत दोषी ठहराया है.
कोर्ट का फैसला सुनते ही राजेश और नूपुर तलवार रो पड़े. यही नहीं कोर्ट में मौजूद उनके परिवार वालों की आंखों से भी आंसू छलक आए. फैसले के बाद दोनों दोषियों को गिरफ्तार कर डासना जेल भेज दिया गया. जेल में उन्हें कंबल, मग और खाने का बर्तन मुहैया कराया जाएगा. इसके साथ ही दोनों को अलग-अलग सेल में रखा जाएगा.
फैसले के बाद राजेश और नूपुर तलवार की ओर से मीडिया में एक बयान जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि वे फैसले से नाखुश हैं. बयान के मुताबिक, 'हम फैसले से बहुत दुखी हैं. हमें एक ऐसे जुर्म के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, जो हमने किया ही नहीं. लेकिन हम हार नहीं मानेंगे और न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेंगे.'
तलवार दंपति की एक रिश्तेदार ने फैसले के बाद कहा, 'ट्रायल की जरूरत ही क्या थी. लोगों को पहले से पता था क्या होने वाला है. सीबीआई की गरिमा को बचाने के लिए सच को झूठ की परतों में दबा दिया गया.' उधर, बचाव पक्ष के वकील ने इस फैसले को गलत माना है. उन्होंने कहा कि ये गैरकानूनी है. तलवार दंपति की वकील रेबेका जॉन ने कहा है कि वे फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगै.
तस्वीरों में देखें: जब राजेश तलवार पर हुआ हमला
हर ओर घूमी शक की सुई, सीबीआई पर भी आरोप
उत्तर प्रदेश पुलिस और सीबीआई की अलग अलग तर्कों के साथ ही इस मामले में कई उतार-चढ़ाव आए. शुरुआत में शक की सुई राजेश तलवार पर, जबकि उसके बाद उनके मित्रों के घरेलू सहायकों पर और फिर राजेश और उनकी पत्नी नूपुर तलवार पर गई. मामला शुरू से ही मीडिया में छाया रहा, जिस कारण अगस्त 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया के सनसनीखेज रिपोर्टिंग पर रोक लगा दी. वहीं, तलवार दम्पति ने सीबीआई पर आरोप लगाया था कि जांच को मोड़ने और कथित रूप से कई चीजों को लीक करके उनकी छवि को 'नुकसान' पहुंचाया गया.
शक के घेरे में पिता राजेश तलवार शुरुआत में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी जांच इस आधार पर की कि हेमराज ने आरुषि की हत्या की और फिर घटनास्थल से फरार हो गया. अगले दिन हेमराज का शव फ्लैट की छत पर मिलने के बाद शक की सुई आरुषि के पिता राजेश तलवार पर आ गई, जिसे उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के इस गिरफ्तारी और उस सनसनीखेज आरोप ने मीडिया का ध्यान खींचा कि हत्यारा और कोई नहीं किशोरी का पिता है, जिसने आरुषि और हेमराज को आपत्तिजनक स्थिति में देखने के बाद गुस्से में कदम उठाया. इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी. सीबीआई के संयुक्त निदेशक अरुण कुमार के नेतृत्व में सीबीआई के एक दल ने यह निष्कर्ष निकाला कि हत्याएं तलवार की क्लीनिक में सहायक कृष्णा थडराई, उसके मित्र राजकुमार और तलवार के पड़ोसी के ड्राइवर विजय मंडल द्वारा किया गया. राजकुमार तलवार के मित्र प्रफुल और अनीता का घरेलू सहायक था.
सीबीआई के तत्कालीन निदेशक अश्विनी कुमार ने इस निष्कर्ष को खारिज कर दिया और अरुण कुमार की दलीलों में खामियां बताईं. सितम्बर 2009 में कुमार ने संयुक्त निदेशक जावेद अहमद और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक नीलाम किशोर के नेतृत्व में एक नयी टीम का गठन किया और उन्हें अपनी टीम के सदस्यों का चुनाव करने की आजादी दी. इस जांच दल ने करीब एक साल की गहन जांच के बाद सहायकों को शक से मुक्त कर दिया और परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर राजेश तलवार की भूमिका का संकेत दिया.
अदालतों के चक्कर काटते रहे राजेश और नूपुर तलवार
जांच दल ने 29 दिसम्बर 2010 को मामले में 'अपर्याप्त सबूत' का हवाला देते हुए मामले को बंद करने की रिपोर्ट दायर की. इसे जिला मजिस्ट्रेट प्रीति सिंह ने खारिज कर दिया. उन्होंने आदेश दिया कि इसमें तलवार दम्पति के खिलाफ मामला चलाया जाना चाहिए. अदालत ने कहा, 'ऐसे मामले में जिसमें घटना घर के भीतर हुई, दिखाई देने वाले सबूतों को नजरंदाज नहीं किया जा सकता.' तलवार दम्पति उसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट गए, जिसने निचली अदालत के समन और उनके खिलाफ शुरू की गई सुनवाई को रद्द करने की मांग वाली उनकी याचिका खारिज कर दी. दम्पति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उन्हें वहां भी राहत नहीं मिली.
सुनवाई का सिलसिला
हत्या मामले में सुनवाई 11 जून 2012 को शुरू हुई. सुनवाई डेढ़ साल तक चली और इस दौरान सीबीआई के कानूनी सलाहकार आरके सैनी ने अपने समर्थन में 39 गवाह पेश किए. वहीं, बचाव पक्ष ने भी सात गवाह पेश किए.
25 जनवरी 2011 को गाजियाबाद अदालत परिसर में एक युवक ने राजेश तलवार पर धारदार हथियार से हमला भी किया. मामले में अभियोजन ने अपनी अंतिम दलीलें 10 अक्टूबर को शुरू कीं, जबकि बचाव पक्ष ने अपनी अंतिम दलीलें 24 अक्टूबर को शुरू करके उसे 12 नवम्बर को पूरा कर लिया.
आरुषि हत्याकांड अब तक
16 मई 2008 को आरुषि की हत्या के बाद उसके पिता राजेश तलवार 23 मई 2008 को गिरफ्तार कर लिया गया था. इस हाईप्रोफाइल केस ने पुलिस को छका कर रख दिया. पुलिस बार-बार बयान बदलती रही और केस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहा था, जिसके बाद 31 मई 2008 को केस सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया. जून में राजेश तलवार के कंपाउंडर कृष्णा को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया गया. 10 दिन बाद तलवार के दोस्त के नौकर राजकुमार और विजय मंडल को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया गया था.
सीबीआई जांच कर रही थी, लेकिन दिसबंर 2010 में आखिरकार सीबीआई थक गई और क्लोजर रिपोर्ट यह कहते हुए दाखिल की गई कि उसे राजेश तलवार पर ही शक है, लेकिन उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है. उसके बाद तलवार दंपति इस क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ कोर्ट चले गए. कोर्ट ने भी रिपोर्ट को रिजेक्ट कर दिया और एक नाटकीय घटनाक्रम में तलवार दंपति को फिर से समन जारी कर दिया और सीबीआई को दोबारा मामला चलाने का आदेश दिया गया.
फरवरी 2011 में गाजियाबाद की स्पेशल कोर्ट ने राजेश तलवार और नुपुर तलवार पर ट्रायल शुरू करने के आदेश दिए सीबीआई कोर्ट ने अदालत में मौजूद ना रहने पर तलवार दंपति के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया. अप्रैल 2011 में नुपुर तलवार को गिरफ्तार कर लिया गया.
आखिरकार मई 2011 में कोर्ट ने राजेश तलवार और नपुर तलवार पर हत्याकांड को अंजाम देने और सबूत मिटाने का आरोप तय कर दिया. सितबंर 2011 में नुपुर तलवार को जमानत मिल गई. अप्रैल 2013 में सीबीआई के अधिकारी ने कोर्ट में कहा कि आरुषि और हेमराज की हत्या तलवार दंपति ने ही की है. सीबीआई ने कोर्ट को ये भी बताया कि आरुषि और हेमराज आपत्तिजनक अवस्था में मिले थे.
बचाव पक्ष के वकील ने 3 मई को स्पेशल कोर्ट के सामने अपील की कि वह 14 हवाहों को कोर्ट में बुलाए. सीबीआई ने इस अपील का विरोध किया. 6 मई 2013 को तलवार की इस अर्जी को ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया. साथ में राजेश और नूपुर के बयानों को रिकॉर्ड करने के भी आदेश दिए. 13 मई को सुप्रीम कोर्ट ने तलवार दंपत्ति को कड़ी फटकार लगाते हुए उनकी अर्जी को खारिज कर दिया. कुल मिलाकर तारीख बढ़ती गई और आखिरकार लंबे इंतजार के बाद आरुषि और हेमराज को न्याया मिल ही गया.
सीबीआई के पास इस केस थे यह सबूत
फॉरेंसिक एक्सपर्ट बोले, जांच में खामियां u


जैसे ही कोर्ट का फैसला आया, राजेश और नूपुर तलवार के अलावा कोर्ट में मौजूद उनके संबंधियों की आंखों से भी आंसू छलक आए.
विस्तृत कवरेज: राजेश और नूपुर तलवार ने ही की आरुषि-हेमराज की हत्या
फैसले के बाद राजेश और नूपुर तलवार की ओर से मीडिया में एक बयान जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि वे फैसले से नाखुश हैं. बयान में कहा गया है, 'हम फैसले से बहुत दुखी हैं. हमें एक ऐसे जुर्म के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, जो हमने किया ही नहीं. लेकिन हम हार नहीं मानेंगे और न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेंगे.'
तलवार दंपति की एक रिश्तेदार ने फैसले के बाद कहा, 'ट्रायल की जरूरत ही क्या थी? लोगों को पहले से पता था कि क्या होने वाला है. सीबीआई की गरिमा को बचाने के लिए सच को झूठ की परतों में दबा दिया गया.'
उधर, बचाव पक्ष के वकील ने इस फैसले को गलत माना है. उन्होंने कहा कि ये गैरकानूनी है. बहरहाल, फैसले के बाद दोनों दोषियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें डासना जेल भेजा जा रहा है.
गौरतलब है कि सीबीआई की विशेष अदालत ने राजेश और नूपुर तलवार को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराया है. इसके अलावा राजेश तलवार को आईपीसी की धारा 203(गलत एफआईआर दर्ज कराने के दोषी), 201(सबूत मिटाना) और 34(कॉमन इंटेंशन) के तहत दोषी माना है. वहीं, नूपुर को 302 के अलावा धारा 201 और 34 के तहत दोषी ठहराया है.
जाति हावी, मुद्दे गौण
Assembly elections in rajasthan
बाड़मेर। विधानसभा में जनप्रतिनिधियों को भेजने की तैयारी में लगे थार के मतदाताओं को रिझाने के लिए मुद्दे तो हैं लेकिन प्रचार-प्रसार में गौण हो रहे हैं। मतदाताओं से बात करें तो जातिगत समीकरण हावी हो रहा है। प्रत्याशी भी मतदाता को लुभाने के लिए जाति के आधार पर नेताओं को जोड़ने और प्रभाव के लिए जातिगत सभाएं करवाने में जुटे हैं। जाति से जीतजीत के लिए गठबंधन पर जोर दिया जा रहा है। बड़ी जातियों को अपनेे पक्ष में लेने और उनके नेताओं को इसके लिए तैयार करने पर जोर है ताकि वहां जाति एक साथ एक ही प्रत्याशी या पार्टी के पक्ष में मतदान करे। इसके लिए पूरी नेताओं की जमात लगी हुई है। समझौते और गठबंधन भी इस बात पर होने लगे हैं कि कौनसी जाति किस ओर जाएगी। रिफाइनरी बड़ा मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा है रिफाइनरी। बायतु में रिफाइनरी प्रस्तावित थी, पचपदरा में शिलान्यास हो गया। अब दोनों ही पार्टियां इस पर खुलकर बात नहीं कर रही हैं।औद्योगिक हबरिफाइनरी के साथ ही औद्योगिक हब की दरकार है। इसकी स्थापना कहां और कैसे करवाई जाएगी इस पर जोर नहीं दिया जा रहा।मीठा पानी1957 में हरिके बैराज से हिमालय का पानी थार के लिए रवाना हुआ था। अभी भी अधिकांश जगह यह नहीं पहुंचा है। पिछले सालों में कार्य जरूर हुआ है। इस मुद्दे पर हर चुनाव में बात होती है।बालोतरा बने जिलाक्षेत्रफल की दृष्टि से बाड़मेर बड़ा जिला है। कई चुनावों में बालोतरा को जिला बनाने की मांग उठी है लेकिन पांच साल बाद वही ढाक के तीन पात। इस बार फिर यही स्थिति है।डीएनपीडेजर्ट नेशनल पार्क में रहने वालों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। बाड़मेर-जैसलमेर के 73 गांव परेशान हैं। यह फिर मुद्दे में शामिल किया गया है,लेकिन पांच साल तक लोग सशक्त पैरवी को तरसते रहे।विभागों में पदरिक्ततासीमांत जिले की यह बड़ी समस्या है। चिकित्सक, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी यहां नियुक्त तो होते हंै लेकिन फिर अपने अपने जिलों में चले जाते है। यहां पदरिक्तता ही रहती है। इससे हर सरकारी सेवा प्रभावित हो रही है। इसके स्थायह समाधान की बात नहीं हो रही।क्राप कटिंग आधारित बीमाकिसानों को क्राप कटिंग आधारित फसल बीमा की जरूरत है, जो पहले दिया जाता था। अब बीमा का पैमाना बदल दिया गया है। बड़ी दूरी की रेलबाड़मेर अब औद्योगिक विकास कर रहा है। यहां से बड़ी दूरी की रेलोे की दरकार है। विशेषकर महाराष्ट्र व गुजरात को जोड़ने वाली। बैंगलोर के लिए एक रेल घोषित हुई थी लेकिन प्रारंभ नहीं हो पाई।तकनीकी शिक्षारिफाइनरी, पेट्रोलियम उत्पादन, लिग्नाइट कोयला और अन्य उत्पाद से विकास के द्वार खुले हैं। हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है। लाखों के पैकेज पर जिले में इंजीनियर व अन्य जानकार कार्य कर रहे हैं। बाड़मेर के युवा इससे वंचित हैं। यहां इस प्रकार की पढ़ाई का प्रबंध नहीं है। चुनावों में इसकी बात नहीं हो रही है।जीरा मण्डीबाड़मेर जीर उत्पादन में पूरे पश्चिमी राजस्थान में अव्वल है। जिले का सारा जीरा गुजरात के ऊंझा जा रहा है। बाड़मेर में जीरा मण्डी की स्थापना की मांग हो रही है।खेल विद्यालयखो-खो, कबड्डी, जिम्नास्टिक, वालीबॉल सहित कई खेलों में लड़के ही नहीं जिले की लड़कियां भी प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर अव्वल हैं। जिले में खेल विद्यालय की स्थापना की दरकार है।लघु उद्योग विकासखादी उत्पाद, कशीदाकारी सहित ऎसे कई कार्य हंै जिसमें ग्रामीण महिलाएं सिद्धहस्त है। स्वयं सहायता समूह भी हैं लेकिन कार्य का नतीजा नहीं आ रहा है। इसको लेकर योजना की दरकार हैं।दोनों शहर परेशानबाड़मेर और बालोतरा दोनों शहरों में मास्टर प्लान के अनुरूप विकास, सफाई व्यवस्था , जलापूर्ति, सड़कों की बेकार स्थिति, रोड़ लाइटों का बंद रहना आम समस्या हो गई है। इसको लेकर प्रतिदिन लोग परेशान हैं। चुनावों में इस पर बात ही नहीं हो रही।विकास कहांबाइपास और रिंग रोड को अधिकांश कस्बे और दोनों मुख्य शहर तरस रहे हैं। रिंग रोड तो सबसे बड़ी जरूरत है। दोनों ही शहरों में ढंग के पार्क नहीं है। बाड़मेर में बस स्टैंड जरूर बना है,बालोतरा तरस रहा है। इन पर भी हो बातविकास के साथ अवैध खनन, भूमाफिया, शराब तस्करी, नशाखोरी की बढ़ती प्रवृत्ति, अपराधों में वृद्धि, महिला अत्याचार, अतिक्रमण सहित कई मुद्दे हैं जो प्रतिदिन लोगों से जुड़े हैं, इसको लेकर कोई जुबान नहीं खोल रहा।
भास्कर न्यूज क्च बाड़मेर शहर में चोरी की वारदाते दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। इससे लोगों की रातों की नींद उड़ी है। लगातार दूसरे दिन फिर तीन मकानों के ताले तोड़कर चोर गहने व नकदी ले गए। यह सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में हुई चोरी की वारदाताओं का पुलिस अभी तक खुलासा नहीं कर पाई है। इससे शहर के लोगों में भय का माहौल बना है। शनिवार रात्रि में शहर के लक्ष्मीनगर मोहल्ले में चोरों ने एक ही रात में तीन घरों में साफ साथ कर लाखों के जेवर व नकदी चुरा ली। सर्दी के मौसम में चोर गिरोह सक्रिय होने से बीते कुछ दिनों से लगातार चोरी की वारदातें हो रही है। कहने को तो शहर में रात्रि गश्त में होमगार्ड व पुलिस के जवान लगाए गए है, लेकिन इन जवानों की गश्त के बावजूद भी लगातार चोरी की वारदातें हो रही है। शनिवार को लक्ष्मीनगर मोहल्ले में जबर सिंह पुत्र छोटू सिंह रावणा राजपूत का परिवार अपने दूसरे घर रॉय कॉलोनी गया हुआ था। ऐसे में पीछे बंद मकान का फायदा उठाकर डाका डाल दिया। घर का ताला तोडऩे के साथ ही वहां शराब भी पी और चने भी गिराए। इतना ही नहीं चोर के हौसले इतने बुलंद थे कि वो कुछ देर आराम करने के लिए बाथरूम में बिस्तर पर सो भी गया। घर की तिजोरियों में रखे 6 तोला सोने के जेवर करीब 15 हजार रुपए नकद चुरा लिए। इसी तरह हीराराम विश्नोई के घर में भी चोरों ने साफ किए। जहां 1.5 तोला सोना, 40 तोला चांदी, घडिय़ां व मोबाइल चुरा लिए। इसी तरह हेमाराम गौड़ के घर पर भी चोरों ने दीवार से फांदकर घर के अंदर टंगी कमीज की जेब से नकद राशि, मोबाइल चुरा लिए। इन सभी वारदातों के बाद सूचना मिलने पर जब पुलिस मौके पर पहुंची तो मानो पुलिस अधिकारियों के पैरों से भी जमीन खिसक गई। पुलिस ने घटनास्थल का मौका मुआयना किया और चोरों की तलाश शुरू की।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ तृणमूल कांग्रेस के सांसद कुणाल घोष कोशारदा बैंक घोटाला मामले में शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। बिधाननगर के उपायुक्त (गुप्तचर विभाग) अर्नब घोष ने बताया, कुणाल घोष को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। वह अब हमारी हिरासत में हैं। अब तक हुए जांच में हमें इस बात के सबूत मिले हैं कि वह शारदा समूह के अध्यक्ष सुदिप्ता सेन एवं अन्य लोगों के साथ साजिश रचने वालों में शामिल थे।