गुरुवार, 5 फ़रवरी 2015

भास्कर न्यूज | सिणधरी/ बालोतरा

भास्कर न्यूज | सिणधरी/ बालोतरा 

राष्ट्रसंतमहोपाध्याय ललितप्रभसागर महाराज ने कहा कि खुशियां किसी के बाप की नहीं, अपने आपकी होती है। अगर हमारा फैसला है कि मैं हर हाल में खुश रहूंगा तो दुनिया की कोई ताकत हमें नाखुश नहीं कर सकती। 

उन्होंने कहा कि आनंद हमारा स्वभाव है इसलिए खाने को मिल जाए तो खाने का आनंद लें और मिले तो उपवास का आनंद लें, चलें तो यात्रा आनंद लें और बैठें तो आनंद की यात्रा करें। शादी हो जाए तो संसार का आनंद लें और हो तो शील का आनंद लें। व्यक्ति को हर परिस्थिति का आनंद लेने की कला सीख लेनी चाहिए। जो अपने आपको किसी भी हालत में प्रभावित होने नहीं देता वह सदा खुश रहता है। संत ललितप्रभसागर महाराज सकल जैन श्री संघ की ओर से सिणधरी के आराधना भवन में आयोजित दिव्य प्रवचन समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवन में कब क्या हो जाए इसका कोई अता-पता नहीं है। जब लक्ष्मी की अवतार सीता को भी अपने बच्चों को जन्म लेने के लिए किसी ऋषि के आश्रम में शरण लेनी पड़ी तो हमारी क्या बिसात है। व्यक्ति भगवान श्री कृष्ण से प्रेरणा ले कि जिनके जन्म के समय कोई थाली बजाने वाला नहीं था और मृत्यु के समय कोई रोने वाला नहीं था। 

फिर भी वे जिंदगी भर हंसते-मुस्कुराते हुए जिएं। उन्होंने कहा कि घर-परिवार के लोग तो जैसे हैं वैसे ही रहेंगे, इसलिए उनके सुधारने की भूल करें। पूरी दुनिया को सुधारने का ठेका तो भगवान का है हमारा, पर अगर हमने खुद को सुधार लिया तो सदा खुश रहने में सफल हो जाएंगे। खुश रहने का पहला मंत्र देते हुए संत ने कहा कि दुनिया में जो मिला है, जैसा मिला है, उसका स्वागत करना सीखें। अगर बेटा कहना माने तो ठीक और कहना मानें तो सोचें कि रोज-रोज कहने की झंझट समाप्त हो गई। हमें कहीं सम्मान मिलने वाला है, पर उसके बदले अपमान मिल जाए तो उसे सहजता से स्वीकार कर लें। उदाहरण के माध्यम से समझाते हुए संत ने कहा कि कभी जीवन में सुख आए तो समझना चाचाजी आए हैं वे सौ का खाएंगे और पांच सौ देकर के जाएंगे और दुख आए तो समझना दामाद आया है, दो सौ का खाएगा और ऊपर से हजार लेकर जाएगा। फिर भी हम चाचा से ज्यादा खुश दामाद के आने पर होते हैं। इसलिए जीवन में सुख आए तो कहिए वेलकम, पर दुख आए तो कहिए मोस्ट वेलकम। खुश रहने के अगले मंत्र में संत ने कहा कि मुस्कुराता हुआ चेहरा दुनिया का सबसे खूबसूरत चेहरा होता है। काला व्यक्ति भी जब मुस्कुराता है तो बहुत सुंदर लगता है, और गौरा अगर मुंह लटकाकर बैठ जाए तो बहुत भद्दा दिखने लग जाता है। इसलिए हर दिन की शुरुआत मुस्कुराते हुए करें। हमारे जेब में भले ही हो मोबाइल पर चेहरे पर सदा रहे स्माइल के उदाहरण से सीख देते हुए संत ने कहा कि जब हम फोटोग्राफर के सामने पांच सैकंड मुस्कुराते हैं तो हमारा फोटो सुंदर आता है और हम अगर हर पल मुस्कुराएंगे तो सोचो हमारी जिंदगी कितनी सुंदर बन जाएगी। 

संतोंका किया स्वागत 

इससेपूर्व संत ललितप्रभ एवं मुनि शांतिप्रिय सागर महाराज के गांव में पहुंचने पर जैन समाज के लोगों के साथ ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं की आेर से स्वागत किया गया। कार्यक्रम में संघ अध्यक्ष सोहनलाल मंडोवरा, देवीचंद मंडोवरा, नैनमल देसाई, भंवरलाल मंडोवरा, भंवरलाल देसाई, शांतिलाल मंडोवरा, आनंदीलाल मुणोत, कांतिलाल मंडोवरा, बाबूलाल सिंघवी, जगदीश वैष्णव आदि श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौजूद थे। 

संतोंने किया बाड़मेर की ओर विहार 

संतोंने आराधना भवन में श्रद्धालुओं को महामांगलिक प्रदान कर बाड़मेर की ओर विहार किया। वे गुरुवार को सणपा फाटा और शाम को सरणू पहुंचेंगे। जहां उनके प्रवचन कार्यक्रम आयोजित होंगे। संतगण चवा और रावतसर होते हुए शनिवार को बाड़मेर शहर में मंगल-प्रवेश करेंगे। जहां उनके विविध सत्संग समारोह और विराट प्रवचनमाला आयोजित होगी। 

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